BE PROUD TO BE AN INDIAN

बुधवार, मार्च 15, 2017

रूप देवगुण की कहानियों में प्रेम ( अंतिम भाग )

मानवेतर प्राणियों से प्रेम 

प्रेम का संबंध सिर्फ व्यक्तियों से नहीं | मानवेतर प्राणियों से भी प्रेम हो जाता है | मानवेतर प्राणी भी प्रेम को समझते हैं और प्रत्युत्तर में प्रेम करते हैं | सामान्यत: उनकी वफादारी आदमी से भी अधिक होती है | कुत्ता इनमें से सबके आगे है | कुत्तों को अक्सर घरों में पाला जाता है और कुत्ते और उसके मालिक के बीच आदमी-पशु जैसे संबंध न रहकर अपनत्व के संबंध पैदा हो जाते हैं | कुता मालिक और उसके परिवार को अपना मानता है | ‘ समभाव ’ इसी प्रेम को दर्शाती कहानी है |

बुधवार, मार्च 08, 2017

रिश्तों और संबंधों की कहानियाँ

अनाम रिश्ते

रिश्ते सिर्फ खून के ही नहीं होते | कुछ रिश्ते खून से बाहर भी होते हैं | खून से बाहर के रिश्ते अक्सर खून के रिश्तों से ज्यादा महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं, क्योंकि खून के रिश्ते चुनने का अधिकार आपको नहीं होता, लेकिन खून से बाहर के रिश्ते आप खुद चुनते हैं | आमतौर पर हर रिश्ते का नाम होता है, लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं जिनका कोई नाम नहीं होता | ये अनाम रिश्ते अनाम होते हुए भी कुछ ऐसी बात रखते हैं कि इन्हें रिश्ते कहा जाता है | इनमें प्रेम भले ही गुमनाम रूप में बहता है, लेकिन इनमें प्रेम होता अवश्य है, क्योंकि बिना प्रेम के कोई रिश्ता, रिश्ता हो ही नहीं सकता, खासकर ऐसा रिश्ता जिसे चुनने, छोड़ने का अधिकार आपको हर वक्त है | प्रेम के जिस रूप को कोई नाम न दिया जा सके, जिसे किसी परिभाषा में न बांधा जा सके, प्रेम का वो रूप जिन रिश्तों में बहता है, उन्हें अनाम रिश्ते कहा जाता है और ऐसे अनाम रिश्ते बहुधा नाम वाले रिश्तों से कहीं अधिक बेहतर और कहीं अधिक पवित्र होते हैं | ‘ वेदना का चक्रव्यूह ’ ऐसे ही अनाम रिश्ते की कहानी है | यह रिश्ता है यामिनी और प्रकाश के दरम्यान |

बुधवार, मार्च 01, 2017

वासनाजनित आकर्षण को दिखाती कहानियां

आकर्षित होकर लोग प्रेम की ओर ही बढ़ेंगे, यह जरूरी नहीं | कई बार यह आकर्षण वासना को भी जन्म देता है | इस वासना का शिकार कई बार दोनों पक्ष होते हैं तो कभी कोई एक | यह वासनाजनित आकर्षण अक्सर पवित्र दोस्ती को कलुषित कर देता है | दोस्ती को पवित्र रिश्ता माना जाता है या यूँ कहें कि रिश्तों से भी पवित्र होती है दोस्ती, लेकिन दोस्त बनाना जितना आसान है, दोस्ती निभाना उतना ही मुश्किल है | खासकर आधुनिक दौर में जब विपरीत लिंगी दोस्त बन जाते हैं, तब इस रिश्ते की पवित्रता बनाए रखना बड़ी मुश्किल चुनौती होती है | 

बुधवार, फ़रवरी 22, 2017

सहज आकर्षण की कहानियाँ

भाग- 1
भाग - 2 
भाग - 3 
भाग - 4 
भाग - 5 
आकर्षण प्रकृति का शाश्वत नियम है | नैगेटिव और पाजिटिव सदैव एक दूसरे को आकर्षित करते हैं | मानव में भी विपरीत लिंगियों के बीच आकर्षण पाया जाता है | यह स्वाभाविक ही है | यही आकर्षण प्रेम का आधार है | आकर्षण के बिना प्रेम संभव ही नहीं, क्योंकि प्रेम तभी होगा, जब कोई अच्छा लगेगा | अच्छा लगना ही आकर्षण है | प्रेम के लिए आकर्षण आवश्यक तो है, लेकिन आकर्षण ही प्रेम नहीं | यह महज पहला सोपान है | आकर्षण हर बार प्रेम में बदले, यह भी ज़रूरी नहीं | 

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